एक पत्नी अपने पति से क्या कहती है कविता को आखिर तक पढ़े……
सुनो......!
प्रिय पतिदेव...
मै ये नहीं कहती हूँ, आपसे कि आप मेरे लिए चाँद तारे तोडकर लाओ...लेकिन जब आप ऑफिस (Office) से घर आते हो तो साथ में एक मुस्कान जरूर साथ लाओ......!
मै ये नहीं कहती हूँ, आपसे कि आप मुझे ही सबसे ज्यादा प्यार करो...
लेकिन मेरे हक का प्यार मुझे दे दिया करो या फिर एक बार प्यार भरी नजरों से मुझे देख
लिया करो. .....!
मै ये नहीं कहती हूँ आपसे कि आप मुझे बाहर खाना खिलाने लेकर जाओ...
लेकिन 3 वक़्त का नहीं बल्कि कम से कम एक बार का खाना तो मेरे साथ बैठ के खाया करो...!
मै ये नहीं कहती हूँ आपसे कि काम में मेरा हाथ बंटाओ...लेकिन मै कितना काम करती हूँ कम से कम देख तो लिया करो...!
मै ये नहीं कहती हूँ आपसे कि मेरा हाथ पकड कर के चलो या
फिर 24 घटे मेरे साथ रहो...
लेकिन कभी - कभार दो कदम ही सही पर मेरे साथ चला करो...!
मै ये नहीं कहती हूँ आपसे कि आप अपने माता-पिता का कहना मत मानना या फिर उनकी बातों पे विश्वास मत किया करो.
लेकिन मेरी बातों का नहीं पर फीलिंग (feeling) को समझ लिया करो…...!
मै ये नहीं कहती हूँ आपसे कि आप अपने माता-पिता से मेरे लिए लड़ो…….
लेकिन मेरे हक के लिए भी कुछ बोला करो यानि मेरे लिए भी साथ खड़े (stand) रहो करो.
मै ये नहीं कहती हूँ आपसे कि... आप मुझे कई नामों से आवाज लगाओ...
पर कभी - कभार एक बार ही फुर्सत से... सुनो ना ही कह दिया करो...!
प्रिय पतिदेव... यूँ ही कट जाएगा, सफ़र का जिंदगी भागते भागते...
कभी-2 एक – दो पल के लिए मेरे साथ भी बैठ तो जाया करो...!
मै ये नहीं कहती हूँ, आपसे कि आप मेरे लिए चाँद तारे तोडकर लाओ...
लेकिन जब आप ऑफिस (Office) से घर आते हो तो साथ में एक मुस्कान जरूर साथ लाओ......!
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