Thursday, February 27, 2025

"माँ बनने का सफर: इतिका की मुस्कान"

"माँ बनने का सफर: इतिका की मुस्कान"

अनु मेहता की जिंदगी में एक नया सवेरा तब हुआ, जब उसने अपनी नन्ही परी इतिका को पहली बार अपनी गोद में लिया। 05 नवंबर 2019, एक ऐसी तारीख थी जिसने उसकी पूरी दुनिया बदल दी। Tanda Medical College, Kangra में जब डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, "बधाई हो, आपको बेटी हुई है!" तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।

अनु हमेशा से चाहती थी कि उसकी पहली संतान एक बेटी हो। और जब भगवान ने उसकी यह मुराद पूरी की, तो उसे यकीन हो गया कि यह रिश्ता किसी खास वजह से बना है। इतिका का नाम उसके दिल के सबसे करीब था, क्योंकि यह नाम सिर्फ उसकी बेटी का ही नहीं, बल्कि उसकी दुनिया का दूसरा नाम बन चुका था।

माँ बनने का एहसास

माँ बनने के बाद अनु को एहसास हुआ कि एक माँ की जिंदगी में त्याग, समर्पण और प्रेम की कितनी गहरी परिभाषा छुपी होती है। उसे अब अपनी माँ के हर संघर्ष की कीमत समझ में आने लगी थी। रातों को जागना, छोटी-छोटी चीजों का ख्याल रखना, अपने हर सपने से पहले इतिका के सपनों को रखना – यह सब अब उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका था।

बचपन की नटखट बातें

इतिका सिर्फ एक प्यारी बच्ची नहीं थी, बल्कि एक जिज्ञासु आत्मा भी थी। उसे ड्राइंग, डांसिंग, बैडमिंटन और तरह-तरह की नई चीजें सीखने का बेहद शौक था। छोटी उम्र में ही उसने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और कई पुरस्कार भी जीते। उसकी यह उपलब्धियाँ अनु के लिए किसी सपने से कम नहीं थीं।

इतिका में लीडरशिप क्वालिटी भी कूट-कूट कर भरी थी। स्कूल में बच्चे उसे बहुत पसंद करते थे, क्योंकि वह सभी की मदद करती और नए-नए आइडियाज लेकर आती थी। अनु को लगता था कि उसके चेहरे के फीचर्स भले ही उसके पापा पर गए हों, लेकिन उसकी शरारतें, मुस्कान और नटखट स्वभाव पूरी तरह उसी पर था।

माँ-बेटी की दोस्ती


अनु और इतिका सिर्फ माँ-बेटी नहीं, बल्कि सबसे अच्छी दोस्त भी थीं। वे दोनों साथ में फोटो क्लिक करवाना, मैचिंग ड्रेस पहनना और तरह-तरह के पोज़ देना बहुत पसंद करती थीं। कभी-कभी अनु को लगता था कि इतिका सिर्फ उसकी बेटी नहीं, बल्कि उसकी आत्मा का वह हिस्सा है, जिसे भगवान ने उसके पास भेजा है।

बदलाव का सफर

माँ बनने के बाद अनु को बहुत बदलाव महसूस हुए। जहाँ पहले वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा कर देती थी, अब वह हर चीज को सबर और प्यार से समझने लगी थी। अब उसे एहसास हो गया था कि माँ बनना सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक यात्रा है – प्यार, देखभाल और अटूट विश्वास की यात्रा।

अब उसकी सुबह इतिका की हँसी से होती और रात उसकी मीठी कहानियों से। माँ बनने का सफर, एक खूबसूरत एहसास से भरपूर था। अनु जानती थी कि जैसे-जैसे इतिका बड़ी होगी, यह सफर और भी खूबसूरत मोड़ लेगा। लेकिन एक बात तय थी – यह रिश्ता ताउम्र वैसा ही रहेगा, जैसा पहले दिन था – प्यारा, अनमोल और अटूट।

🌸💖 "क्योंकि माँ बनना सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि पूरी ज़िंदगी को नया अर्थ देना है।" 💖🌸

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