दोस्ती – एक अनमोल रिश्ता
कितने अजीब हैं ये रिश्ते, जो किस्मत से मिलते हैं,
अपनी यारी को जन्नत बना जाते हैं।
कभी हॉस्टल की टोली में, कभी नोट्स की गलियों में,
चाय की चुश्कियों संग, दिलों के दरवाज़े खुलते हैं।
कोई मस्ती का यार बना, कोई टिफिन का हिस्सेदार,
कभी साथ खिलखिलाए, कभी गलियों में मार खाए।
धीरे-धीरे रंग बदलती, दोस्ती और गहराई,
कहीं बेस्ट फ्रेंड, कहीं सीक्रेट साथी बन आई।
कभी रूठना, कभी मनाना, कभी खामोशियाँ,
यादों में समेटे हमने ये छोटी-छोटी कहानियाँ।
फिर आया वो दिन, जब बिछड़ने की घड़ी आई,
नम आँखों में सपने, दिल में यादों की परछाई।
कोई पास नहीं, मगर सब साथ हैं,
मिलते आज भी, क्योंकि दोस्ती की यही तो बात है।

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